नई दिल्ली : समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग स्थिति है। कहीं इसे लागू किया जा चुका है, तो कहीं कानून बनाने की प्रक्रिया चल रही है। कुछ राज्यों में अभी यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा तक सीमित है।
संविधान के नीति निदेशक तत्वों के अनुच्छेद 44 में भी सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता की दिशा में प्रयास करने की बात कही गई है। ऐसे में यूसीसी को लेकर राज्यों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनी हुई है।
उत्तराखंड में लागू हो चुका है यूसीसी
उत्तराखंड ने 27 जनवरी 2025 को समान नागरिक संहिता लागू कर देश में एक नई मिसाल कायम की। इसके साथ ही उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बन गया।
कानून के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े मामलों के लिए समान नियम बनाए गए हैं। विवाह पंजीकरण को अनिवार्य किया गया है, जबकि लिव-इन संबंधों के पंजीकरण का भी प्रावधान है। अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
गोवा में पहले से है समान नागरिक व्यवस्था
गोवा में पुर्तगाली शासन के समय से लागू पुर्तगाली सिविल कोड का संशोधित रूप आज भी प्रभावी है। इसी कारण गोवा को देश में समान नागरिक कानून की सबसे पुरानी मिसालों में माना जाता है।
यहां विवाह, संपत्ति और पारिवारिक मामलों से जुड़े कई नियम सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होते हैं।
गुजरात में विधेयक पारित
गुजरात ने भी यूसीसी की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। विधानसभा से संबंधित विधेयक पारित हो चुका है। हालांकि, इसे जमीन पर लागू करने के लिए नियम और प्रशासनिक व्यवस्था तैयार करने की प्रक्रिया बाकी है।
मध्य प्रदेश में भी बढ़ी हलचल
मध्य प्रदेश में भी यूसीसी को लेकर विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ी है। प्रस्तावित व्यवस्था में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े मामलों के लिए समान नियमों पर जोर दिया गया है।
राजस्थान में कानून लाने की तैयारी
राजस्थान सरकार भी समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। राज्य में मसौदा तैयार करने और विधानसभा में विधेयक लाने की तैयारी की जा रही है। विवाह पंजीकरण, तलाक और उत्तराधिकार जैसे विषयों को इसमें शामिल किए जाने की बात है।
पश्चिम बंगाल में अभी चर्चा तक सीमित
पश्चिम बंगाल में यूसीसी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और बहस जारी है। हालांकि, अभी तक विधानसभा में इससे संबंधित कोई विधेयक पेश नहीं किया गया है।
किस राज्य में क्या स्थिति?
- उत्तराखंड: यूसीसी लागू
- गोवा: समान नागरिक कानून की पुरानी व्यवस्था लागू
- गुजरात: विधेयक पारित
- मध्य प्रदेश: प्रक्रिया आगे बढ़ी
- राजस्थान: कानून की तैयारी
- पश्चिम बंगाल: फिलहाल राजनीतिक चर्चा
यानी यूसीसी को लेकर राज्यों की तस्वीर अलग-अलग है। उत्तराखंड सबसे आगे निकल चुका है, जबकि अन्य राज्यों में कानून बनाने या उसे लागू करने की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में है।
