नई दिल्ली : कल बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर-SIR) को वैध ठहराते हुए कहा कि यह चुनाव आयोग (EC) की ओर से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के संवैधानिक सिद्धांत को लागू करने के लिए किया गया वैध अभ्यास (Lawful Practice) है।
मामले की सुनवाई करने के बाद मुख्य न्यायधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाकर्ताओं की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि एसआईआर दरअसल ‘घुसपैठियों’ को हटाने के नाम पर पीछे के दरवाजे से नागरिकता जांच करने की कोशिश है।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग मनमाने तरीके से नागरिकता तय करने की शक्तियां अपने हाथ में ले रहा है और संसद के बनाए गए कानूनों, नियमों के साथ अपने ही मैनुअल में निर्धारित सीमाओं को अनुचित तरीके से पार कर रहा है।
बता दें कि बिहार में एसआईआर की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखने वाले इस फैसले का असर आगे होने वाले अन्य एसआईआर पर भी पड़ेगा। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में बिहार मामले की सुनवाई जारी रहने के दौरान ही एसआईआर का दूसरा चरण शुरू हो चुका था, जिसमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और असम के साथ-साथ 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 51 करोड़ मतदाता शामिल हैं।
मुख्य न्यायधीश अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत यह अधिकार है कि वह मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए नागरिकता की जांच करे।
