देहरादून : मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में वन विभाग के अधिकारियों के साथ प्रदेश में इको-टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ावा देने के संबंध में समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में इको-टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं और इसे स्थानीय लोगों की आजीविका से जोड़ते हुए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

बैठक में मुख्य सचिव ने प्रदेश की ट्रैकिंग पॉलिसी तैयार कर अगस्त तक कैबिनेट में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य में ट्रैकिंग के लिए नई चोटियों को भी खोला जाए और इसके लिए आवश्यक अनुमतियों एवं मंजूरियों की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए। साथ ही उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को चिन्हित चोटियों का ऑडिट शीघ्र पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने वन क्षेत्र के अंतर्गत संचालित सभी माउंटेनियरिंग, ट्रैकिंग, पर्यटन स्थलों और वन विश्राम गृहों की बुकिंग व्यवस्था पूरी तरह ऑनलाइन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे क्षमता से अधिक बुकिंग पर रोक लगेगी और व्यवस्थाएं अधिक पारदर्शी बनेंगी।

उन्होंने जबरखेत मॉडल पर विकसित की जा रही नौ इको-टूरिज्म साइटों का अक्टूबर तक लोकार्पण सुनिश्चित करने को कहा।

बैठक में प्रदेश में औपचारिक नेचर गाइड प्रशिक्षण व्यवस्था शुरू करने पर भी जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने स्थायी नेचर गाइड ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने, पाठ्यक्रम तैयार करने तथा भारत सरकार के पाठ्यक्रम के साथ अतिरिक्त विषय जोड़कर सर्टिफिकेशन कोर्स शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने इसे अक्टूबर में आयोजित होने वाले वाइल्ड लाइफ वीक के दौरान शुरू करने का लक्ष्य तय किया।

मुख्य सचिव ने वन विश्राम गृहों, ट्रैकिंग के लिए चिन्हित 31 साइटों, इको कैंप और इको हब के संचालन के लिए वन विभाग या वन निगम में से किसी एक एजेंसी का चयन कर एक माह के भीतर विस्तृत योजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वन निगम को और अधिक सशक्त बनाने के लिए आवश्यक प्रस्ताव भी शीघ्र शासन को भेजे जाएं।

बैठक में वन प्रमुख (हॉफ) कपिल लाल, सचिव वन सी. रविशंकर, धीराज गर्ब्याल, पीसीसीएफ नीना ग्रेवाल, सीसीएफ (इको-टूरिज्म) पी.के. पात्रो, अपर सचिव हिमांशु खुराना सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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